July 19, 2026

बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार; कहा- पहले हाई कोर्ट जाएं

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नई दिल्ली: बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन के आरोप में दाखिल अवमानना याचिकाओं पर सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्य अलग-अलग हैं और इनकी जांच संबंधित हाई कोर्ट में होनी चाहिए। इसी के साथ याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालयों का रुख करने की छूट दे दी गई।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रत्येक याचिका में अलग-अलग तथ्यात्मक विवाद हैं। ऐसे में हर मामले के तथ्यों की जांच और मूल्यांकन सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर संभव नहीं है। अदालत ने सभी अवमानना याचिकाओं को संबंधित हाई कोर्ट में विचार के लिए भेजने का निर्देश दिया।

राज्य सरकारों पर दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अनस तनवीर ने दलील दी कि बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद कई राज्यों में उनका पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों ने भी पाया कि संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च अदालत के आदेशों की जानकारी तक नहीं दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि स्मारकों, धार्मिक स्थलों और निजी संपत्तियों पर की गई कुछ बुलडोजर कार्रवाइयां सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत थीं और इन्हें दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया गया।

2024 के फैसले के उल्लंघन का लगाया गया आरोप

दरअसल, वर्ष 2024 में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विभिन्न राज्यों से कई अवमानना याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में दावा किया गया था कि सर्वोच्च अदालत की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।

याचिकाकर्ताओं ने गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाया

सुनवाई के दौरान सोमनाथ में कुछ मस्जिदों को गिराए जाने से जुड़े मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने अदालत से कहा कि गंभीर उल्लंघन वाले मामलों में सर्वोच्च अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि अवसर दिया जाए तो वह कम समय में ही यह साबित कर सकते हैं कि अदालत के निर्देशों का गंभीर उल्लंघन हुआ है।

वहीं, महाराष्ट्र से जुड़े एक अन्य मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र उदय सिंह ने दलील दी कि कई स्थानों पर स्थानीय नेताओं की सार्वजनिक घोषणाओं के बाद बुलडोजर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे से भी यह स्पष्ट हो सकता है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका यह भी कहना था कि कई मामलों में ऐसी कार्रवाई दंडात्मक प्रकृति की प्रतीत होती है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इन मामलों में तथ्यात्मक विवादों की जांच और सुनवाई का उचित मंच संबंधित हाई कोर्ट होंगे।

 

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