July 19, 2026

भारत में लॉन्च हुआ ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन, स्कूलों में कक्षा 3 से एआई शिक्षा का होगा संरचित विस्तार

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नई दिल्ली: देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को भारत मंडपम में ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन (एचएआईएलएम) का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस मिशन का उद्देश्य कक्षा 3 से 12 तक के विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल लीडरों के लिए एआई शिक्षा का एक संरचित और जिम्मेदार मॉडल उपलब्ध कराना है, ताकि स्कूलों में एआई आधारित शिक्षा को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा सके।

मिशन के तहत आयु के अनुरूप पाठ्यक्रम, लाइव सत्र, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस), वीडियो पाठ, इंटरैक्टिव गतिविधियां, शिक्षक प्रशिक्षण, नीतिगत संसाधन और कक्षा में उपयोग के लिए तैयार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, बुनियादी स्तर की एआई शिक्षा को देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों तक निःशुल्क पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है।

छात्रों में जिम्मेदार एआई उपयोग विकसित करने पर फोकस

मिशन ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युवाओं के सीखने, जानकारी खोजने, कंटेंट तैयार करने और तकनीक से जुड़ने का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। हालांकि, बड़ी संख्या में छात्र अभी भी यह नहीं समझ पाते कि एआई कैसे काम करता है और उसके परिणामों का सही मूल्यांकन कैसे किया जाए। ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन का उद्देश्य छात्रों को केवल एआई उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि उसके जिम्मेदार और व्यावहारिक उपयोग के प्रति जागरूक बनाना है।

एआई-साक्षर भारत बनाने का लक्ष्य

ह्युमेन एआई लिटरेसी मिशन के चीफ विजनरी मणित जैन ने कहा कि एआई बच्चों के सीखने, काम करने और निर्णय लेने के तरीके को तेजी से बदल रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि छात्र केवल तकनीक का उपयोग करना ही न सीखें, बल्कि उसकी संभावनाओं, सीमाओं और जिम्मेदारियों को भी समझें।

उन्होंने कहा कि मिशन का उद्देश्य ऐसा समग्र मॉडल विकसित करना है, जिससे स्कूल लीडर प्रभावी नीतियां बना सकें, शिक्षक जिम्मेदार उपयोग के लिए मार्गदर्शन दे सकें और छात्र समझ सकें कि तकनीक उनके भविष्य को किस तरह प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

भारतीय स्कूलों के अनुरूप तैयार किया गया मॉडल

मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित यादव ने कहा कि एआई साक्षरता को प्रभावी बनाने के लिए उसे भारतीय स्कूलों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मिशन को छात्रों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित मार्गदर्शक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि विभिन्न परिस्थितियों में भी स्कूल इसे आसानी से अपना सकें और छात्र जिम्मेदारी के साथ एआई का उपयोग करना सीख सकें।

शिक्षा मंत्री ने बताया भविष्य की जरूरत

कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि स्कूलों में डिजिटल बदलाव के बाद अब यह आवश्यक हो गया है कि छात्र और शिक्षक एआई आधारित प्रणालियों को सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ समझें। उन्होंने कहा कि कम उम्र में एआई की समझ विकसित होने से विद्यार्थी तकनीक के साथ अधिक आत्मविश्वास और समझदारी से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा को व्यवस्थित और समावेशी बनाने वाली पहलें छात्रों को उभरती तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

देशभर के स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी

मिशन के लॉन्च के बाद अब स्कूलों को इस पहल से जोड़ने, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने और शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के साथ साझेदारी बढ़ाने पर काम किया जाएगा। इसके अलावा राज्यवार विस्तार और संस्थागत सहयोग से जुड़ी जानकारी भी चरणबद्ध तरीके से साझा की जाएगी। मिशन का उद्देश्य ऐसी नई पीढ़ी तैयार करना है, जो एआई को समझने, उसका मूल्यांकन करने और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने में सक्षम हो।

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