August 4, 2026

Census 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू, पहली बार होगी जाति की गिनती; माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान भी पूछे जाएंगे

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नई दिल्ली: देशभर में Census 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार जनगणना के दौरान जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान का विवरण भी जुटाए जाने की संभावना है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना 1 से 30 सितंबर के बीच कराई जाएगी।

17 से 30 अगस्त तक मिलेगी स्व-गणना की सुविधा

दूसरे चरण की शुरुआत से पहले 17 अगस्त से 30 अगस्त तक लोगों को स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस प्रक्रिया के तहत नागरिक स्वयं ऑनलाइन अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों में जनगणना का फील्ड सर्वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा किया जाएगा।

पहली बार उत्तरदाता के बताए अनुसार दर्ज होगी जाति

सूत्रों के अनुसार इस बार जाति संबंधी जानकारी उत्तरदाता द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर दर्ज की जाएगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित सूची उपलब्ध रहेगी, जबकि ‘जाति’ का विकल्प केवल गैर-अनुसूचित जाति और गैर-अनुसूचित जनजाति श्रेणी के उत्तरदाताओं के लिए रहेगा। उत्तरदाता जिस प्रकार अपनी जाति बताएगा, उसी प्रकार उसकी स्पेलिंग रिकॉर्ड की जाएगी।

जाति बताने के लिए किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

जनगणना के दौरान जाति की जानकारी देने के लिए किसी भी प्रकार का जाति प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा। संबंधित राज्य में लागू अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची के आधार पर विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। सत्यापन के लिए अलग से दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे।

2011 की जनगणना में सामने आई थीं 45 हजार से अधिक जातियां

एक अधिकारी के अनुसार वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के दौरान स्व-घोषणा के आधार पर 45 हजार से अधिक जातियों के नाम दर्ज हुए थे। इससे आंकड़ों का विश्लेषण और वर्गीकरण चुनौतीपूर्ण हो गया था। इस बार डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आंकड़ों को व्यवस्थित और श्रेणीबद्ध करने की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी की गई है।

माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान भी पहली बार होंगे दर्ज

दूसरे चरण में पहली बार माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। यह जानकारी नागरिकता से जुड़े मानकों को समझने में उपयोगी मानी जा रही है। पहले राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर की प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के साथ हुई थी और इसे 2021 की जनगणना के साथ दोहराने की योजना थी, लेकिन जनगणना स्थगित होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर की प्रक्रिया को Census 2027 से अलग रखा गया है।

स्व-गणना क्या है और कैसे होगी?

स्व-गणना एक ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसके तहत नागरिक निर्धारित पोर्टल पर स्वयं अपने परिवार का विवरण भरकर जमा कर सकते हैं। इस सुविधा का उद्देश्य लोगों को जनगणना प्रक्रिया में स्वयं भागीदारी का विकल्प देना है, जिससे गणनाकर्मी के आने का इंतजार किए बिना जानकारी दर्ज कराई जा सके।

 

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