लखनऊ में 18 हजार से ज्यादा सस्ते फ्लैट बनेंगे, LDA की नई योजना से हजारों परिवारों का घर खरीदने का सपना होगा पूरा
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में किफायती घर का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) शहर के जोनल डेवलपमेंट प्लान के तहत 18,113 किफायती फ्लैट विकसित करने जा रहा है। यह आवास विशेष रूप से कम आय वर्ग और सीमित संसाधनों वाले परिवारों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इस योजना से करीब 90 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
सुल्तानपुर रोड से कानपुर रोड के बीच बनेंगे नए फ्लैट
एलडीए के सर्वे के अनुसार क्लस्टर-2, यानी सुल्तानपुर रोड से कानपुर रोड के बीच किफायती आवासों की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसी जरूरत को देखते हुए इस क्षेत्र में 18,113 नए आवास विकसित करने की योजना तैयार की गई है। प्राधिकरण ने जोनल डेवलपमेंट प्लान के मानचित्र में इन आवासों के निर्माण के लिए स्थान भी चिन्हित कर दिए हैं।
करीब 800 वर्ग फुट होगा फ्लैट का क्षेत्रफल
प्रस्तावित योजना के तहत बनने वाले प्रत्येक किफायती फ्लैट का क्षेत्रफल लगभग 800 वर्ग फुट रखा गया है। इन आवासों को निम्न आय वर्ग के परिवारों की जरूरतों और बजट को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा।
53.83 हेक्टेयर भूमि पर होगा निर्माण
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इन आवासों के निर्माण के लिए लगभग 53.83 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। एलडीए ने जोनल डेवलपमेंट प्लान में इसके लिए भूमि का प्रावधान भी कर दिया है। जिन क्षेत्रों में फ्लैट विकसित किए जाने हैं, उन्हें आवासीय उपयोग के लिए चिह्नित किया गया है।

क्लस्टर-1 में नहीं बनेगा नया आवास
एलडीए के अनुसार क्लस्टर-1, यानी अयोध्या रोड से सुल्तानपुर रोड के बीच पहले से पर्याप्त किफायती आवास उपलब्ध हैं। इसी वजह से इस क्षेत्र में नई आवासीय योजना का प्रस्ताव नहीं रखा गया है। प्राधिकरण का मानना है कि क्लस्टर-2 में नए फ्लैट बनने से लखनऊ के साथ-साथ आसपास के जिलों के लोगों की आवासीय जरूरत भी पूरी होगी।
पांच स्थानों पर आरक्षित की गई जमीन
किफायती आवास योजना के लिए शहर के विस्तार वाले क्षेत्रों में पांच प्रमुख स्थानों की पहचान की गई है। इनमें लखनऊ-रायबरेली रोड, किसान पथ, बक्कास रेलवे स्टेशन क्षेत्र और सुल्तानपुर रोड के आसपास के इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुल 61.66 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है। स्थानों का चयन भविष्य की आबादी, परिवहन सुविधाओं और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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