August 20, 2026

UP: टिकट नहीं मिला तो भी रेलवे नहीं बच पाएगा! हाईकोर्ट ने दिया 8 लाख मुआवजे का आदेश, देरी पर 9% ब्याज भी देना होगा

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लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रेलवे से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यात्री के पास से ट्रेन का टिकट बरामद न होना अपने आप में मुआवजे के दावे को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने 2011 में चलती ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाले शिव नारायण सिंह की विधवा लाली को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। निर्धारित समय के बाद भुगतान होने पर रेलवे को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की एकल पीठ ने लाली की ओर से दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए रेलवे दावा न्यायाधिकरण के 2017 के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायाधिकरण ने उस समय मुआवजे का दावा खारिज कर दिया था।

2011 में लाल किला एक्सप्रेस से गिरने का मामला

मामला 21 नवंबर 2011 का है। शिव नारायण सिंह इटावा से दिल्ली जाने वाली लाल किला एक्सप्रेस में सवार हुए थे। आरोप है कि सराय भूपत रेलवे स्टेशन के पास वह चलती ट्रेन से गिर गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। घटना के बाद उनके शव के तीन टुकड़े मिले थे।

मामले में रेलवे की ओर से यह दलील दी गई कि मुआवजे का दावा करने वाले पक्ष पर पहले यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि मृतक वास्तव में ट्रेन से यात्रा कर रहा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि केवल टिकट नहीं मिलने के आधार पर दावे को स्वतः खारिज नहीं किया जा सकता।

विधवा और गवाह की गवाही को कोर्ट ने माना अहम

मृतक की विधवा और एक अन्य गवाह ने अदालत के सामने गवाही दी कि शिव नारायण सिंह ने द्वितीय श्रेणी का टिकट लेकर यात्रा की थी। अदालत के समक्ष रेलवे इस दावे का खंडन करने के लिए टिकट बिक्री का रिकॉर्ड या कोई अन्य ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

हाईकोर्ट ने इसी आधार पर माना कि टिकट का बरामद न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मृतक ट्रेन में यात्री नहीं था। अदालत ने मुआवजे के दावे को खारिज करने वाले न्यायाधिकरण के फैसले को सही नहीं माना।

शव के तीन टुकड़े मिलने की दलील भी नहीं मानी

हाईकोर्ट ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मृतक का शव तीन टुकड़ों में मिला, इसलिए यह माना जा सकता है कि वह पटरियों पर चल रहा था और उसी दौरान ट्रेन की चपेट में आया।

अदालत ने इस आधार को मुआवजे से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और रेलवे को मृतक की विधवा को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। भुगतान में तय समय से देरी होने पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

 

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