July 9, 2026

राम मंदिर चढ़ावा मामला: 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर तीन आरोपी, पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े राज

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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित चोरी के मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को अदालत ने 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस दौरान पूछताछ से चोरी की रकम, उसके इस्तेमाल, डिजिटल साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

पूछताछ के आधार पर जुटाए जाएंगे नए साक्ष्य

पुलिस ने अदालत में रिमांड की मांग करते हुए कहा था कि आरोपियों से मिली जानकारियों के आधार पर अभी कई अहम साक्ष्य जुटाए जाने बाकी हैं। जांच अधिकारी अब आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेंगे। पुलिस का मानना है कि कस्टडी रिमांड के दौरान अब तक सामने नहीं आए कई तथ्य उजागर हो सकते हैं।

एसआईटी की रिपोर्ट के बाद तेज हुई जांच

मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और उसके दिशा-निर्देशों के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाया गया।

सात दिन की मांग, अदालत ने 40 घंटे की रिमांड दी

पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की सात दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। हालांकि, विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत ने सुनवाई के बाद तीनों को 40 घंटे की कस्टडी रिमांड मंजूर की। सुनवाई के दौरान मामले के विवेचक और क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी अदालत में मौजूद रहे। पुलिस ने दलील दी कि आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर नए साक्ष्य जुटाना आवश्यक है।

बचाव पक्ष ने किया विरोध, फिर भी मंजूर हुई रिमांड

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने पुलिस की रिमांड अर्जी का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद बुधवार सुबह पुलिस तीनों आरोपियों को जेल से अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ के लिए रवाना हुई।

मोबाइल चैट और डिजिटल रिकॉर्ड बने जांच का अहम आधार

इससे पहले 5 जुलाई को अदालत की अनुमति के बाद पुलिस ने जेल में करीब पांच घंटे तक तीनों आरोपियों से पूछताछ की थी। इस दौरान मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। जांच अधिकारियों ने आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ करने के साथ ही मिली जानकारियों का मौके पर सत्यापन भी कराया था।

रिमांड के दौरान नई बरामदगी की उम्मीद

जांच एजेंसियां अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर नए साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामान बरामद करने का प्रयास करेंगी। एसआईटी को उम्मीद है कि पूछताछ से कथित चोरी की रकम के लेन-देन, पूरी योजना और इस मामले में संभावित अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

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