August 5, 2026

देश की पहली फ्रेट वंदे भारत ने रचा नया रिकॉर्ड! इमरजेंसी ब्रेकिंग टेस्ट में शानदार प्रदर्शन, परिचालन की ओर बढ़ा बड़ा कदम

vande-bharat-1785867725

कोटा: देश की पहली वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) ने तकनीकी परीक्षणों में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में रेक का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इस परीक्षण के दौरान सूखी और गीली दोनों प्रकार की पटरियों पर ट्रेन की ब्रेकिंग क्षमता और सुरक्षा प्रणाली का आकलन किया गया।

चार चरणों में परखी गई ब्रेकिंग क्षमता

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण चार चरणों में पूरा किया गया। परीक्षण के दौरान रेक में मौजूद तीनों इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम—लोको ब्रेक, ट्रेन ब्रेक और पुश बटन ब्रेक—की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच की गई।

हर परीक्षण में ब्रेक लगाए जाने के स्थान से लेकर ट्रेन के पूरी तरह रुकने तक की दूरी का सटीक मापन किया गया। इसके आधार पर ब्रेकिंग प्रणाली की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया गया।

आरडीएसओ और आईसीएफ के विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ परीक्षण

यह परीक्षण अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन के तत्वावधान में आयोजित किया गया। परीक्षण के दौरान आरडीएसओ के निदेशक (टेस्टिंग) अनन्जय मिश्रा, आईसीएफ चेन्नई के सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर सुधांशु कुमार, मुख्य लोको निरीक्षक रामनिवास मीना, यातायात निरीक्षक महेंद्र सिंह मीणा सहित आरडीएसओ, आईसीएफ के तकनीकी विशेषज्ञ और लोको क्रू मौजूद रहे।

29 जुलाई से जारी हैं तकनीकी परीक्षण

कोटा मंडल में 29 जुलाई 2026 से देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू के विभिन्न तकनीकी परीक्षण लगातार किए जा रहे हैं। इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण की सफलता को रेक के भविष्य के परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण माल परिवहन के लिए विकसित इस नई सुपरफास्ट पार्सल रेक की सुरक्षा और परिचालन क्षमता को परखने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को भी मिली अहम मंजूरी

इस बीच, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रगति भी सामने आई है। बंबई हाई कोर्ट ने 13 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन के निर्माण के लिए मैंग्रोव के पेड़ों की कटाई की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि संबंधित प्रस्ताव को सक्षम अधिकारियों की जांच और स्वीकृति मिल चुकी है।

अदालत ने यह भी कहा कि परियोजना स्थल से दूर प्रतिपूरक वनीकरण करना केवल औपचारिकता पूरी करने जैसा है और इससे स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन बहाल नहीं हो सकता। यह आदेश महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की याचिका पर दिया गया, जिसके तहत दहानू सब-स्टेशन से पालघर जिले के प्रस्तावित अंबरसेराई ट्रैक्शन सब-स्टेशन तक 132 किलोवाट विद्युत लाइन बिछाई जाएगी। यह लाइन मैंग्रोव और निजी वन क्षेत्र के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगी, जिससे हाई-स्पीड रेल प्रणाली को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

 

......................................................................................................... --------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र