न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद को लेकर अपनाए जाने वाले कथित दोहरे रवैये पर जमकर निशाना साधा। भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकवादी संगठनों को तैयार कर उनका इस्तेमाल किया, अब वही ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ उसके लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। भारत के मुताबिक, आतंकवाद का यह नेटवर्क अब अपने कथित पालने वालों के नियंत्रण से बाहर हो चुका है और पाकिस्तान को ही निशाना बना रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी राघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से खुद को आतंकवाद से लड़ने वाला देश और उसका पीड़ित बताता रहा है। लेकिन वह इस तथ्य को नजरअंदाज करता रहा है कि उसकी सरकार ने जिन ‘खतरनाक राक्षसों’ को तैयार किया और बाद में जिन पर नियंत्रण खो दिया, वे पहले पड़ोसी देशों में हिंसा फैलाते रहे और अब पाकिस्तान में भी उसी तरह के हमले कर रहे हैं।
पुरी ने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान की एक प्रांतीय मुख्यमंत्री ने भी इस खतरे को स्वीकार किया है। उन्होंने 2018 में उनके पिता और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठनों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप एक साथ दो विरोधी पक्षों का समर्थन नहीं कर सकते। हकीकत इस तरह काम नहीं करती।”
पाकिस्तान के बयान पर भारत का पलटवार
यूएन महासभा की छठी समिति की बैठक के दौरान पुरी पाकिस्तान के डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव उस्मान जादून की ओर से भारत के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। छठी समिति संयुक्त राष्ट्र के कानूनी मामलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है।
इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विरोधाभासों का भी उल्लेख किया। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के हालिया बयान का हवाला देते हुए पुरी ने कहा कि उन्होंने स्वयं माना है कि पंजाब के लिए खतरा केवल पड़ोसी देशों से नहीं, बल्कि पड़ोसी प्रांतों से भी अधिक है।
‘पाकिस्तान की जीत के दावों में दम नहीं’
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की ओर से किए गए कथित जीत के दावों पर भी भारत ने करारा जवाब दिया। पुरी ने पाकिस्तान के दावों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर बमबारी से क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और गड्ढों से भरे रनवे पाकिस्तान को जीत के संकेत नजर आते हैं तो वह इसे अपनी जीत मानकर खुश हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामों को लेकर पाकिस्तानी सेना के नैरेटिव को सही साबित करने की कोशिश राज्य प्रायोजित गलत सूचना और मनोवैज्ञानिक अभियान की उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा है।
‘पहलगाम में धर्म पूछकर किया गया था निशाना’
पुरी ने पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमले में आतंकवादियों ने पीड़ितों को निशाना बनाने से पहले उनकी धार्मिक पहचान पूछी थी। उन्होंने कहा, “पहलगाम में पीड़ितों से उनकी राजनीतिक विचारधारा नहीं पूछी गई थी, उनसे उनका धर्म पूछा गया था।”
उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान एक ओर धार्मिक नफरत के खिलाफ लड़ाई की बात करता है, जबकि दूसरी ओर ऐसे हालात बनाए रखने के आरोपों का सामना करता है, जिनमें सीमा पार आतंकवाद के जरिए यह नफरत बढ़ती रहती है।
पुरी ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने कहानी गढ़ने, गलत सूचनाएं फैलाने और दुष्प्रचार करने के बजाय आतंकवाद से निपटने पर उतना ध्यान दिया होता, तो दुनिया कहीं बेहतर जगह होती।
मसूद अजहर के मुद्दे पर भी पाकिस्तान को घेरा
भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर भी पाकिस्तान पर सवाल उठाया। पुरी ने कहा कि जब मीडिया मसूद अजहर तक पहुंच सकता है और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर उससे प्रतिक्रिया हासिल कर सकता है, तो इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पाकिस्तानी सरकार को उसके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं होगी।