May 30, 2026

Garuda Purana: मृत्यु के बाद 13वें दिन घर छोड़ती है आत्मा? जानिए गरुड़ पुराण में क्या बताया गया है

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नई दिल्ली: सनातन धर्म में मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मृत्यु केवल शरीर का अंत है, जबकि आत्मा की यात्रा इसके बाद भी जारी रहती है। हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति, उसकी यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक नियमों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

मान्यता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के तुरंत बाद उसकी आत्मा पृथ्वीलोक को नहीं छोड़ती। गरुड़ पुराण के अनुसार आत्मा करीब 13 दिनों तक अपने घर, परिवार और परिजनों के आसपास रहती है। इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद तेरहवीं तक कई धार्मिक कर्म और नियमों का पालन किया जाता है।

13वें दिन का क्यों होता है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद 13वां दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन आत्मा अपने परिवार और घर को अंतिम बार देखकर आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करती है। इसलिए तेरहवीं के दिन पूजा-पाठ, पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज जैसे धार्मिक कार्य किए जाते हैं।

मान्यता यह भी है कि इस दौरान पूर्वज अपने परिजनों को देखने आते हैं। इसी कारण घर का वातावरण शांत, पवित्र और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है, ताकि मृत आत्मा को शांति मिल सके।

गरुड़ पुराण में बताए गए हैं कई नियम

गरुड़ पुराण में तेरहवीं तक कुछ विशेष सावधानियां बरतने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान घर में साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। पूजा स्थल को स्वच्छ रखने और घर में अनावश्यक विवाद या शोर-शराबे से बचने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा रात में अकेले बैठकर अत्यधिक विलाप करने या मृत व्यक्ति को बार-बार पुकारने से भी मना किया गया है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से आत्मा का मोह बढ़ सकता है और उसे शांति प्राप्त करने में बाधा आ सकती है।

श्राद्ध कर्मों को क्यों माना गया है जरूरी

हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले श्राद्ध कर्मों को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इन कर्मों के माध्यम से मृत आत्मा को शांति और सद्गति प्राप्त होती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पिंडदान और तर्पण जैसे कर्म आत्मा की आगे की यात्रा को सरल बनाने में सहायक माने जाते हैं।

गरुड़ पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि परिवार के लोग यदि श्रद्धा और नियमों के साथ इन धार्मिक कर्मों को पूरा करें तो पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा विषय

धर्माचार्यों के अनुसार, गरुड़ पुराण में वर्णित बातें धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित हैं। अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं में इन नियमों की व्याख्या अलग हो सकती है। ऐसे में लोग अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इन नियमों का पालन करते हैं।

 

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