यूपी के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को स्वाइन फ्लू, प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 685 पहुंची
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह भी संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कराई गई जांच में उनमें इंफ्लूएंजा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बाद वह पृथकवास में चले गए हैं। प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 685 पहुंच गई है।
कई दिनों से बुखार से परेशान थे जयवीर सिंह

सूत्रों के अनुसार पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे और उस दौरान फिरोजाबाद में थे। बाद में वह जांच कराने के लिए लखनऊ पहुंचे। जांच में मलेरिया की रिपोर्ट नकारात्मक आई, लेकिन इंफ्लूएंजा एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हो गई।
स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद उन्होंने खुद को पृथकवास में कर लिया है। चिकित्सकों ने उन्हें निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी है।
29 अगस्त से 1 सितंबर के बीच तेजी से बढ़े मामले
प्रदेश में स्वाइन फ्लू संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 29 अगस्त को जहां मरीजों का आंकड़ा 551 था, वहीं 1 सितंबर तक यह बढ़कर 685 पहुंच गया।
इनमें आधे से अधिक मामले एनसीआर के गौतमबुद्ध नगर, मेरठ और गाजियाबाद जिलों से सामने आए हैं। प्रदेश सरकार पहले ही स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता संबंधी निर्देश जारी कर चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग ने मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में अभी तक किसी भी मौत को आधिकारिक रूप से स्वाइन फ्लू से हुई मौत के रूप में पुष्टि नहीं की है। विभाग ने प्रत्येक संदिग्ध मौत का डेथ ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मौत का कारण स्वाइन फ्लू था या नहीं।
सरकार ने अस्पतालों को जारी किए विशेष निर्देश
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्थिति की विस्तृत समीक्षा की थी। इसके बाद अस्पतालों में फीवर ओपीडी और फीवर डेस्क संचालित करने तथा मरीजों के लिए आवश्यक बेड आरक्षित रखने समेत कई निर्देश दिए गए।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सभी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
लखनऊ के बाद बदायूं में महिला की मौत
इस सीजन में प्रदेश में स्वाइन फ्लू से दो मौतों का मामला सामने आया है। पहले राजधानी लखनऊ में एक महिला की जान गई थी, जबकि मंगलवार को बदायूं में भी एक महिला की मौत हुई।
मंगलवार को लखनऊ में चार नए मरीजों में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें दो मरीजों की जांच पीजीआई, एक की लोहिया संस्थान और एक की निजी प्रयोगशाला में हुई।
इसके साथ ही इस सीजन में राजधानी में स्वाइन फ्लू संक्रमितों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
नए मरीजों में बुखार, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ
नए संक्रमित मरीजों को सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी। मरीजों ने एच1एन1 की जांच कराई और आरटीपीसीआर रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद संक्रमण की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीजों की लगातार निगरानी कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा- घबराएं नहीं, सावधानी जरूर बरतें
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने लोगों से अनावश्यक घबराहट से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि एच1एन1 को लेकर पैनिक की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं बरतनी चाहिए।

लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह के खुद दवा लेने या अप्रशिक्षित व्यक्ति से इलाज कराने से बचने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में सीएमओ कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर 0522-2622080 पर संपर्क किया जा सकता है।
केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा के अनुसार एच1एन1 संक्रमण खांसने और छींकने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है।
निजी केंद्रों में जांच की अधिकतम दर 3000 रुपये तय
स्वाइन फ्लू की आरटीपीसीआर जांच के नाम पर निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों में मनमानी वसूली रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कदम उठाया है। सीएमओ की अध्यक्षता में मंगलवार को निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों के संचालकों की बैठक हुई।
बैठक में एच1एन1 आरटीपीसीआर जांच की अधिकतम दर 3000 रुपये तय की गई। यह दर निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों में लागू होगी।
बैठक में शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के अनुसार पीजीआई में इसी जांच के लिए 2400 रुपये शुल्क निर्धारित है और इसी आधार पर निजी क्षेत्र में जांच की दर तय की गई है।
क्या है इंफ्लूएंजा एच1एन1?
इंफ्लूएंजा एक सामान्य वायरल बीमारी है, जो इंफ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। एच1एन1 इसी वायरस का एक प्रकार है और यह मुख्य रूप से सांस से जुड़ी बीमारी पैदा करता है।
एच1एन1 से संक्रमित होने के बाद आमतौर पर दो से तीन दिन में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसका ऊष्मायन काल एक से चार दिन तक हो सकता है और कुछ मामलों में यह अवधि सात दिन तक भी पहुंच सकती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को कपड़े या रुमाल से ढकें।
बातचीत के दौरान करीब एक से डेढ़ मीटर की दूरी बनाए रखें।
हाथ मिलाने से बचें और संक्रमित वस्तुओं को छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
बुखार, खांसी या जुकाम जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह लें।
इन लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत
10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
रक्त संबंधी बीमारी, डायबिटीज, तंत्रिका तंत्र की बीमारी, कैंसर या एचआईवी से पीड़ित लोगों को भी विशेष सावधानी की जरूरत है।
फेफड़े, हृदय, किडनी या लिवर की बीमारी से पीड़ित मरीजों तथा लंबे समय से कॉर्टिसोन जैसी दवाओं का उपचार ले रहे लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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