October 6, 2026

वोटर आईडी के Form-6 से हटी विवादित शर्त, भारी विरोध के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली: देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान और प्रशासनिक मतभेदों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने बड़ा और अहम कदम उठाया है। चुनाव आयोग ने उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण ‘फॉर्म-6’ से एसआईआर से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। पूर्ण आयोग द्वारा हाल ही में यह स्पष्ट किया गया था कि यह अतिरिक्त नियम केवल पुनरीक्षण अभियान की अवधि के दौरान ही प्रभावी रहेगा, जिसके बाद अब इसे औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया है।

इन राज्यों के पोर्टल्स से हटी शर्त, अब भरना होगा सामान्य फॉर्म
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया विधिवत समाप्त हो चुकी है, वहां अब आयोग के आधिकारिक ECINET ऐप-पोर्टल और संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पोर्टल्स से इस अतिरिक्त डिक्लेरेशन कॉलम को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन राज्यों में अब नए मतदाताओं को अपना नाम जुड़वाने के लिए केवल ‘निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित मूल वैधानिक फॉर्म-6 ही भरना होगा और उन्हें किसी भी तरह के अतिरिक्त कागजी फेरबदल से नहीं गुजरना पड़ेगा।

जहां पुनरीक्षण जारी है, वहां पूर्वजों का ब्योरा देना अभी भी अनिवार्य
आयोग ने साफ किया है कि जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में अभी भी एसआईआर की प्रक्रिया गतिमान है, वहां नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के साथ यह अतिरिक्त घोषणा ECINET पोर्टल पर यथावत उपलब्ध रहेगी। इस अतिरिक्त शर्त के तहत नए पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को स्वयं को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी को किसी पूर्व गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची से जोड़ने वाला प्रामाणिक विवरण देना अनिवार्य किया गया है।

चुनाव आयुक्तों के तीखे विरोध से गरमाया था विवाद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर ही इस बदलाव को लेकर मतभेद उजागर हुए। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 में अतिरिक्त डिक्लेरेशन जोड़ने पर गंभीर कानूनी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना 1960 के नियमों के तहत तय वैधानिक फॉर्म में कोई फेरबदल नहीं किया जा सकता और इसे अवैध बताते हुए पोर्टल से हटाने की मांग की गई थी। हालांकि, दूसरी ओर चुनाव आयोग का रुख यह रहा कि मूल फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि यह सिर्फ एसआईआर अभियान के लिए एक अस्थाई जरूरत थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर से जुड़े अपने फैसले में भी वैध ठहराया था।

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